MCD: DBC KARMACHARIYO PAR 1996-2021 TAK ATYACHAAR KI HAD

मलेरिया विभाग में DBC 1996 में जब दिल्ली में 423 मौते हुई थी , तब भर्ती हुई थे । हैल्थ वर्कर पोस्ट पर

आज 25 साल हो चुके हैं और 2021 आ गया है । 3500 कर्मचारी सेवा दे रहे हैं । मात्र 15,547 रू प्रति माह वेतन मिल रहा है । जो 25 साल के बहुत ही लम्बे अर्से से पहले 1800 रू मात्र में लगे थे , आज वर्तमान में 1500रु EPF काट लिया जा रहा है । इन कर्मचारियों ने फौज कि तरह अपनी जवानी निगम कि सेवा में लगा दी डेंगू कि भयानक बिमारी को रोकने में इनकी बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका है



ये छतों पर टंकियां चैक करते हैं , कंस्ट्रक्शन साइट चेक करते हैं , भरी गर्मी में बरसात में झुग्गी झोपड़ी में हैजा , या दिमागी बुखार वायरल आदि कि रोकथाम 25 साल से कर रहे हैं , भारत कि राजधानी दिल्ली में कार्य कर रहे हैं , हाउस टैक्स सर्वे, टोल टैक्स,डी डी ऐ PM UDAY में भी ,और Coronavirus Isolation Centre में कार्य करते रहे हैं

DBC कर्मचारियों का कहना है, ” हमारे बच्चे बड़े हो गए हैं , खर्चे बढ़ रहे हैं। उनकी पढ़ाई , शादियां,घर बनाने के लिए हम क्या करें ? हमारे किमती 25 वर्ष हमनें निगम कि सेवा में लगा दिऐ है। हमें अपने अधीकारियो से ये उम्मीद बिल्कुल नहीं थी। ये इतना लम्बा समय को बढ़ा देगे और हमसे कुठारघात करेंगे , हम हिंदुस्तान में ही रहते हैं और भारत के नागरिक हैं अतः हमारा भारत सरकार से अनुरोध है हमारे साथ उचित न्याय बीना पक्षपात और निर्विरोध , राजनीति से ऊपर उठकर सच्चाई से किया जाऐ । हमारे साथ हमारे परिवार जूडे है हमारे कीमती 25 सालों को मध्य नजर रखते हुए हमें उचित न्याय मिले अतः दीनता से निगम कमिश्नर जी से विनम्र निवेदन है , अन्य विभागों में भेजे गये DBCs का आप ध्यान रखें , कोई विश्वास घात न करें।”

दिल्ली निगम कर्मचारी

हैल्थ वर्कर/डी बी सी वर्कर

( DELHI कर्मचारी संघठन )



1 thought on “MCD: DBC KARMACHARIYO PAR 1996-2021 TAK ATYACHAAR KI HAD

  1. Avatarदेव आनंद शर्मा

    निगम प्रशासन और और सभी निगम के मेयर और आल्हा दलों के राजनेताओं ने हमेशा डीबीसी कर्मचारियों को सिर्फ आश्वासन दिया लेकिन आज पहचान तक नहीं दी।
    निगम में हर तरह के कार्य करवाए गए परन्तु क्या उम्मीद करें इस तरह के निगम प्रशासन से कर्मचारी की सुरक्षा नहीं उसके जीवन को कोरोना महामारी मे मरने के लिए आग की भट्टी में झोंका गया आखिर कब तक मिलेगी पहचान ❓

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